जरूरत बन गई

तू आज फिर से मेरी जरूरत बन गई, अदा ना कर सका वो कीमत बन गई, डरा करता तेरे जिन ख्वाबों से, वो ख्वाबों की लड़ी आज हकीकत बन गई।

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